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रही है कब चिंतामुक्त 'घायल' ज़िंदगी जग में, हमेशा किसी न किसी विचार ने वैर साधा है।

When has life ever been free of worry, 'Ghayal', in this world? Always some thought or another has exacted its revenge.

अमृत घायल
अर्थ

ऐ 'घायल', इस दुनिया में जीवन चिंतामुक्त कब रहा है? हमेशा कोई न कोई विचार बदला लेता रहा है।

विस्तार

यह शेर 'घायल' साहब ने ज़िंदगी के एक गहरे सच को बयां किया है। शायर कहते हैं कि इस दुनिया में कब कोई भी ज़िंदगी बिना किसी चिंता के रह पाई है? उनका मानना है कि इंसान के मन में हमेशा कोई न कोई विचार, कोई न कोई वैर या हिसाब-किताब चलता रहता है। यह शेर हमें सिखाता है कि शांति पाना कितना मुश्किल है।

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