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ग़ज़ल

વેર વાળ્યું છે

વેર વાલ્યું છે
अमृत घायल· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल वियोग और जीवन की कठिनाइयों से जूझते हुए एक भावनात्मक और आत्म-चिंतनशील यात्रा है। कवि ने रिश्तों में टूटन और समय के बदलावों के दर्द को बड़ी गहराई से व्यक्त किया है। यह ग़ज़ल जीवन के उतार-चढ़ावों को स्वीकार करने और फिर भी उम्मीद बनाए रखने का संदेश देती है।

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દશા ખુદ રંગરેખાની કહે છે હું નથી કહેતો, જીવનનું ચિત્ર દોરી ચિત્રકારે વેર વાળ્યું છે.
दशा खुद रंग-रेखा की कहती है, मैं नहीं कहता, जीवन का चित्र बनाकर चित्रकार ने बदला लिया है।
रंगों और रेखाओं की दशा स्वयं सब कुछ कह देती है, मैं कुछ नहीं कहता। चित्रकार ने जीवन का चित्र बनाकर मानो अपना प्रतिशोध लिया है।
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નથી અંધેર આઝાદીમાં પણ ઓછું ગુલામીથી, કે વેરણ સાંજની પેઠે સવારે વેર વાળ્યું છે.
नहीं अंधेर आज़ादी में भी कम है ग़ुलामी से,कि वीरान शाम की भाँति सवेरे वैर साधा है।
आज़ादी में भी गुलामी से कम अंधेर नहीं है। सुबह ने तो जैसे वीरान शाम की तरह बदला लिया है, जिसका अर्थ है कि यह नई स्वतंत्रता भी उतनी ही समस्याग्रस्त है।
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