न पहुँचते कभी उस तक शिकायत के छींटे,
तो फिर कहाँ से मिलें हमको दाद के छींटे?
“The splashes of complaint never reach him, Then how can we find the splashes of justice?”
— अमृत घायल
अर्थ
शिकायत के छींटे कभी उस तक नहीं पहुँचते, फिर हमें न्याय के छींटे कहाँ से देखने को मिलेंगे?
विस्तार
ये शेर उस दर्द को बयान करता है जब हमारी बात किसी तक नहीं पहुँचती। शायर पूछते हैं कि अगर शिकायत के छींटे ही किसी तक नहीं पहुँचते, तो हमें न्याय या इंसाफ कहाँ से मिलेगा? यह एक बहुत गहरा सवाल है... कि क्या हमारी आवाज़ सुनी जाएगी, या हम हमेशा यूँ ही बेबस रहेंगे।
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