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ग़ज़ल

ચાહું ત્યારે ઘૂંટ ભરું

چاہوں تو گھونٹ بھروں
अमृत घायल· Ghazal· 7 shers

यह ग़ज़ल एक प्रेमपूर्ण विरह का भाव व्यक्त करती है, जिसमें वक्ता अपने प्रिय की यादों में डूबा हुआ है। इसमें प्रेम की गहराई और उसे पाने की तीव्र लालसा का चित्रण है। यह मन की बेचैनी और प्रेम के एहसास को खूबसूरती से बयान करती है।

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1
ચાહું ત્યારે ઘૂંટ ભરું ને ચાહું ત્યારે ત્યાગ કરું! મારું તો એવું છે મારા ફાવે તેવા ભાગ કરું!
चाहूँ तब घूँट भरूँ और चाहूँ तब त्याग करूँ! मेरा तो ऐसा है, मेरे मनचाहे भाग करूँ!
यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी चीज को ग्रहण या त्याग करता है, और अपने जीवन या संसाधनों के हिस्से अपनी पसंद के अनुसार बनाता है।
4
સારા નરસા દિવસો એ તો ઇચ્છાના ઓછાયા છે, મારા આ દુર્ભાગ્યને સાજન ઇચ્છું તો સોહાગ કરું!
अच्छे-बुरे दिन तो इच्छाओं के साये हैं, मेरे इस दुर्भाग्य को साजन चाहूँ तो सुहाग कर दूँ!
अच्छे-बुरे दिन तो हमारी इच्छाओं के ही प्रतिबिंब हैं। हे प्रिय, यदि मैं चाहूँ तो अपने इस दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल सकती हूँ।
5
દાગ અને આ દિલનો નાતો હાડચામના જેવો છે, મૃત્યુ પૂર્વે કેવી રીતે દિલથી અળગા દાગ કરું!
दाग़ और इस दिल का नाता हाड़-चाम जैसा है,मृत्यु पूर्व कैसे मैं दिल से दाग़ अलग करूँ!
इस दिल और इसके घावों का रिश्ता मांस और हड्डी जैसा गहरा है। मौत से पहले मैं इन दागों को अपने दिल से कैसे जुदा कर सकता हूँ?
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