और तो और, कदरदान दोस्त भी, रखते हैं ऐसा बर्ताव हमसे;
“Others are others, but even appreciative friends, Maintain such a demeanor towards us;”
— अमृत घायल
अर्थ
औरों की बात ही क्या, यहां तक कि कद्रदान मित्र भी हमारे प्रति वैसा ही व्यवहार रखते हैं।
विस्तार
यह दोहा गहरी निराशा को व्यक्त करता है। कवि कहते हैं कि दूसरों की तो बात ही क्या, यहां तक कि उनके कद्रदान और समझने वाले दोस्त भी उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं, जिससे उन्हें तकलीफ पहुँचती है। यह इस बात पर एक मार्मिक टिप्पणी है कि कैसे कभी-कभी जिन लोगों से हम समर्थन की उम्मीद करते हैं, वे ही हमें सबसे ज्यादा ठेस पहुंचाते हैं, जिससे हम अकेला और धोखा महसूस करते हैं। यह दर्शाता है कि दुर्व्यवहार का अनुभव कितना व्यापक हो सकता है, जहां करीबी रिश्ते भी इससे अछूते नहीं रहते।
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