“What a marvel—the lancet pierced the vein of Laila, yet Majnun's vein bled from the surging fervor of love.”
क्या अनोखा तमाशा है कि चीरा तो लैला की नस में लगा, लेकिन प्रेम के अत्यधिक जोश के कारण मजनूँ की नस खुल गई और ख़ून बहने लगा।
यह शेर लैला और मजनूँ के उस मशहूर क़िस्से की याद दिलाता है, जहाँ हकीम ने नश्तर तो लैला की नस में चुभाया, लेकिन बेपनाह इश्क़ के असर से ख़ून मजनूँ की नस से बह निकला। यहाँ शायर ने दो जिस्मों के एक जान हो जाने की रूहानी कैफ़ियत को बेहद ख़ूबसूरती से तराशा है। यह बात दिल को छू जाती है कि सच्ची मोहब्बत में महबूब को होने वाला ज़रा सा भी दर्द आशिक़ के अपने वजूद पर ज़ाहिर हो जाता है।
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