दिल का सौदा इक निगह पर है तिरी ठहरा हुआ नर्ख़ तू क्या पूछता है अब तो क़ीमत खुल गई

“The bargain for the heart was struck upon a single glance of thine; / Why ask about the market rate, now that the price has been revealed?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

मेरे दिल का सौदा तुम्हारी बस एक नज़र पर तय हो चुका है। अब तुम बाज़ार का भाव क्या पूछते हो, जब इसकी क़ीमत तो पहले ही ज़ाहिर हो चुकी है।

विस्तार

यहाँ शायर ने इश्क़ को बाज़ार और दिल को एक नाज़ुक जिंस की तरह पेश किया है। वह महबूब से कहता है कि मेरा दिल तो तुम्हारी महज़ एक निगाह पर बिक चुका है, अब सौदेबाज़ी या बाज़ार का भाव पूछने का कोई मतलब नहीं। जब एक नज़र के बदले ही पूरी ज़िंदगी का सौदा तय हो गया, तो समझो दिल की असली क़ीमत खुलकर सामने आ गई है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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