“Upon your cheek at last the faint dust of youth's down has shown; O mirror-faced, the hidden murkiness within the heart is now made known.”
आख़िरकार तुम्हारे रुख़सार पर बारीक बालों का ग़ुबार ज़ाहिर हो ही गया; ऐ आईने जैसे चेहरे वाले, अब तुम्हारे दिल की कुदूरत (मैल) भी खुलकर सामने आ गई।
इस शेर में शायर अपने महबूब से बड़ी नज़ाकत और शोख़ी से मुख़ातिब है, जिसके आईने जैसे चमकते रुख़सार पर अब बारीक ख़त (ग़ुबार-ए-ख़त) नज़र आने लगा है। पुरानी शायरी में साफ़ चेहरे को आईना और यौवन के उभार के साथ आती हल्की दाढ़ी को आईने पर जमी गर्द से तशबीह दी जाती है। शायर कहता है कि जैसे ही चेहरे के इस आईने पर गर्द नुमायाँ हुई, तुम्हारे दिल की वो छुपी हुई बेरुखी या मैल (कुदूरत) भी पूरी तरह बेपरदा हो गई।
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