Karam sharo dey dharam batawan, Sangal pawan pereen
Zaat mazhab yeh ishq na pochdaa, Ishq shara da weri
“The action may be bad, but the path of righteousness is shown; the nature and religion are not questioned by this love, for love is the enemy of all.”
— बुल्ले शाह
अर्थ
कर्म से धर्म बताएगा, जंगल पवन परेन। ज़ात मजहब ये इश्क़ न पूछता, इश्क़ शरा का वेरी।
विस्तार
Bulleh Shah कहते हैं कि सच्ची भक्ति और प्रेम किसी भी धर्म या सीमा से परे होते हैं। वह बताते हैं कि ईश्वर की कृपा और आत्मा की पवित्रता न तो जाति से बंधती है और न ही किसी विशेष मजहब से। उनके अनुसार, प्रेम की भाषा सार्वभौमिक है, जो दिल से निकलती है, न कि किसी कर्मकांड से। यह संदेश हमें प्रेम की निस्वार्थता का पाठ पढ़ाता है।
