“The heart that understands the worth of poetry, is the same that appreciates the value of a garland. So says Dalpat, what do others know? O Gardener!”
कविता का महत्व समझने वाला हृदय ही माला के मूल्य को भी पहचानता है। दलपत कहते हैं कि भला दूसरे क्या जानें?
दलपतराम जी का यह प्यारा दोहा हमें सिखाता है कि कविता का असली मोल, या किसी भी कला की सच्ची कीमत, हमारे दिल की गहराई में महसूस होती है और समझी जाती है। यह एक सुंदर फूलों की माला की तरह है; केवल वही व्यक्ति जो उसकी सुंदरता को सचमुच सराहता है, उसका वास्तविक मूल्य जानता है। दलपतराम जी कहते हैं कि दूसरों को, जिनमें यह आंतरिक जुड़ाव नहीं होता, शायद इसका सार समझ में न आए। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची सराहना आत्मा से आती है, सिर्फ आँखों या ऊपरी नज़र से नहीं। इसलिए, कला का सही मायने में आनंद लेने के लिए, हमें अपने दिल और दिमाग को उसके गहरे अर्थों के लिए खोलना होगा।
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