“For lakhs, a quarter-seer of joy's bright hue, A seer of this essence, worth lakhs anew. Within the pleasure palace, joy's essence takes its seat, And only the charming beloved, it truly completes.”
आनंद का सार इतना कीमती है कि इसकी थोड़ी सी मात्रा भी लाखों की है, और पूरी माप अनमोल है। यह आनंद रंगमहलों में निवास करता है और केवल आकर्षक एवं सुंदर प्रेमिका को ही शोभा देता है।
यह दोहा 'रंग-रस' यानी खुशी, प्रेम या जीवंत सुंदरता के सार का बहुत सुंदर वर्णन करता है। यह कहता है कि यह 'रंग-रस' अत्यंत अनमोल है, जिसका एक पाव (लगभग २५० ग्राम) सवा लाख रुपये और एक सेर (लगभग १ किलो) पूरे लाख रुपये का है, इसकी अपार कीमत दर्शाता है। यह उत्कृष्ट सार भव्य रंगमहलों, यानी उत्सव और सुंदरता से भरी जगहों में निवास करता है। यह कोई सामान्य चीज़ नहीं है; बल्कि, यह वास्तव में एक आकर्षक, सुंदर और मनमोहक व्यक्ति को ही शोभा देता है। यह सुझाता है कि सच्ची खुशी और प्रेम दुर्लभ खजाने हैं, जो शानदार परिवेश में पाए जाते हैं, और एक उज्ज्वल आत्मा वाले व्यक्ति के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
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