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ચોથી સાંઢણલી ચતુર સુજાણ રે, મોકલો સૂરત શહેર પ્રમાણ રે;
મામા નહારસિંહજી ત્યાં સોહાવે રે, મામો મોસાળાં લઈને આવે રે.

Send the fourth clever and wise camel,Let her proceed to Surat's fair citadel;Uncle Naharsinhji graces that place so grand,He shall bring the wedding gifts in his hand.

दलपतराम
अर्थ

चौथी चतुर और सुजान ऊँटनी को सूरत शहर भेजो। मामा नाहरसिंहजी वहाँ शोभायमान हैं और मोसाळा (विवाह के उपहार) लेकर आएंगे।

विस्तार

यह दोहा भारतीय परंपरा के एक प्यारे रीति-रिवाज का वर्णन करता है, जो अक्सर शादी या बच्चे के जन्म से जुड़ा होता है। इसमें एक चतुर और तेज संदेशवाहक, जिसे 'चौथी ऊंटनी' से दर्शाया गया है, को सूरत शहर भेजने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य मामा नाहरसिंहजी को सूचित करना और आमंत्रित करना है, जो सूरत में रहते हैं। मुख्य संदेश यह है कि वे 'मोसालू' लेकर आएं। 'मोसालू' उन पारंपरिक उपहारों और भेंटों को कहते हैं जो मामा अपनी बहन की बेटी की शादी में या उसके बच्चे के जन्म पर लाते हैं। यह मातृ पक्ष से प्यार, समर्थन और आशीर्वाद का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो इस खास रिश्ते और मामा की अहम भूमिका को दर्शाता है।

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