તારૂં મુખ જોવા કાલી ઘેલી હું થતી;
હું તો જાણતી હૈયાતણો હારરે, દીલડાહી...
“To behold your face, I'd grow quite mad with love;I knew you were my heart's own garland, O wise-hearted one.”
— दलपतराम
अर्थ
तुम्हारे मुख को देखने के लिए मैं बावली हो जाती थी; मैं तो जानती थी कि तुम मेरे हृदय का हार हो, हे समझदार।
विस्तार
यह दोहा एक प्रेमी की गहरी लालसा को खूबसूरती से दर्शाता है। वक्ता अपने प्रिय के चेहरे को देखने के विचार मात्र से ही पूरी तरह से बेसुध और आनंदित हो जाता है। यह एक प्यारी सी बेचैनी और प्रबल स्नेह की भावना है। वे स्वीकार करते हैं कि वे हमेशा से जानते थे कि उनका प्रिय उनके दिल का सबसे अनमोल रत्न है, एक प्रिय खजाना। यह प्यार की एक प्यारी घोषणा है, जो बताती है कि प्रिय उनके अस्तित्व के लिए कितना गहरा प्यारा और केंद्रीय है।
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