રાજાધિરાજ મેઘરાજજીરે; આવિયા ત્યાં આપોઆપ,
છે પ્રૌઢ પ્રતાપ, મંડપ મોટો માંડિયો;
“The Sovereign Meghrajji arrived there himself,Of mighty valor; a grand pavilion was erected.”
— दलपतराम
अर्थ
राजाधिराज मेघराजजी स्वयं वहाँ आए; वे महान प्रतापी हैं और एक विशाल मंडप बनाया गया।
विस्तार
यह दोहा राजाओं के महाराजा मेघराज जी के बारे में है। इसमें बताया गया है कि वह स्वयं ही उस स्थान पर पधारे, अपने साथ अद्भुत प्रताप और महिमा लेकर। उनकी उपस्थिति इतनी महत्वपूर्ण थी कि उनके सम्मान में एक भव्य और विशाल मंडप तैयार किया गया। यह उनकी उच्च पदवी और उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व को दर्शाता है, जिससे यह पता चलता है कि उनकी उपस्थिति मात्र से ही एक भव्य आयोजन का माहौल बन गया। यह एक ऐसे राजा की कहानी कहता है जिसका आगमन ही अपने आप में एक भव्य उत्सव था।
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