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કનક કળશ રથ ઉપર ઝળક્યા, ઘુઘરમાળ ઘમકે ઘણી રે,
ત્યાં તો બનેવીના હણહણે ઘોડા, પડથી વાગે ઘોડલાતણી છે.

Golden pitchers on chariots did gleam,Many strings of bells, a resounding stream.There, the brother-in-law's horses neighed loud,Their hooves striking, echoing through the crowd.

दलपतराम
अर्थ

रथ पर सुनहरे कलश चमक रहे थे, और घंटियों की मालाएँ जोर से बज रही थीं। वहाँ, बहनोई के घोड़े हिनहिना रहे थे, और उनके खुरों की आवाज़ गूँज रही थी।

विस्तार

यह दोहा एक भव्य और रोमांचक आगमन का सजीव चित्रण करता है। कल्पना कीजिए एक शानदार रथ, जिस पर सुनहरे कलश चमक रहे हैं। इस रथ से घुँघरुओं की मधुर झंकार सुनाई देती है, जिससे एक उत्सवपूर्ण माहौल बनता है। तभी, जीजाजी (बनेवी) के घोड़ों के शक्तिशाली हिनहिनाने की आवाज़ हवा में गूँज उठती है, जो उनके आगमन की घोषणा करती है। उनके खुरों की थाप ज़मीन पर एक लयबद्ध धुन पैदा करती है, जो इस भव्यता को और बढ़ा देती है। यह एक विशेष अवसर, जैसे विवाह समारोह की खुशी और गरिमापूर्ण भावना को बखूबी दर्शाता है, जहाँ हर छोटा विवरण भी महत्व और उत्सव से जगमगाता है।

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पाठ
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