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થયું પ્રફુલિત સૂરજના પ્રકાશમાં રે,
એને અંગો અંગ ઉપજ્યો આનંદ રે, બીજે ક્યાંઈ...

It blossomed forth in the sun's bright light,And joy arose in every limb, nowhere else to ignite.

दलपतराम
अर्थ

यह सूर्य के प्रकाश में प्रफुल्लित हुआ, और उसके कण-कण में आनंद छा गया। यह खुशी कहीं और नहीं, बल्कि केवल यहीं से उत्पन्न हुई।

विस्तार

यह सुंदर दोहा हमें सच्ची खुशी का एक मनमोहक चित्र दिखाता है। यह वर्णन करता है कि कैसे कोई चीज़, शायद कोई फूल या पौधा, सूरज की गर्म किरणों में पूरी तरह खिल उठी। जैसे ही उसने सूरज की रोशनी को गले लगाया, उसके रोम-रोम में गहरा आनंद उमड़ पड़ा। यह संपूर्ण प्रसन्नता का अनुभव है, जो भीतर से उभरता है, और प्रकृति के साधारण उपहार – सूर्य के प्रकाश – से सीधे प्रेरित होता है। यह खुशी कहीं और नहीं मिलती; यह उस प्राकृतिक जुड़ाव और खिलने से बंधी एक प्रामाणिक, सर्वव्यापी खुशी है।

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