“Many selfish friends are seen in the world, indeed, throughout the earth.Dalpatram, O clever portrayer, I make my humble plea to you.”
इस संसार में अनेक स्वार्थी मित्र देखे जाते हैं। वक्ता चतुर चितेरे दलपतराम से विनम्र निवेदन करता है।
यह दोहा कवि दलपतराम द्वारा रचित है, जिसमें वे एक गहरी मानवीय भावना व्यक्त करते हैं। कवि कहते हैं कि इस संसार में स्वार्थी मित्रों की भरमार है। वे ऐसे लोगों को देखते हैं जिनकी दोस्ती केवल अपने फायदे तक सीमित होती है। इस कटु सत्य को महसूस करते हुए, दलपतराम फिर एक उच्च शक्ति को संबोधित करते हैं। वे उन्हें "चतुर चित्रकार" कहकर पुकारते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं। यह प्रार्थना शायद इस सांसारिक स्वार्थ से उत्पन्न निराशा को व्यक्त करती है और एक बेहतर सामाजिक व्यवस्था या आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आकांक्षा को दर्शाती है।
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