Sukhan AI
क़तरा क़तरा इक हयूला है नए नासूर का
ख़ूँ भी ज़ौक़-ए-दर्द से फ़ारिग़ मिरे तन में नहीं

Each drop a blueprint for a new, festering sore,My blood within my body, from pain's relish, is never free more.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बूंद-बूंद एक नए नासूर का खाका है। मेरे तन में रक्त भी दर्द के स्वाद से मुक्त नहीं है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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