ले गई साक़ी की नख़वत क़ुल्ज़ुम-आशामी मिरी
मौज-ए-मय की आज रग मीना की गर्दन में नहीं
“My ocean-drinking capacity bore the saqi's pride away;No wave of wine today in the flask's neck-vein does sway.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी सागर-सी पीने की क्षमता ने साक़ी का घमंड चूर कर दिया है; आज शराब की लहर शीशे की गर्दन की रगों में भी नहीं है, यानी सारी बोतलें बिल्कुल खाली हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
