लग़्ज़िश-ए-मस्ताना ओ जोश-ए-तमाशा है 'असद'
आतिश-ए-मय से बहार-ए-गरमी-ए-बाज़ार-ए-दोस्त
“Asad, it's the drunken stumble, the fervor of the show, From wine's fiery glow, the friend's market warmly does glow.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
असद, यह मस्ताना लड़खड़ाहट और तमाशे का जोश है। शराब की आग से दोस्त के बाज़ार में गरमी की बहार आती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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