Sukhan AI
लिखता हूँ 'असद' सोज़िश-ए-दिल से सुख़न-ए-गर्म
ता रख न सके कोई मिरे हर्फ़ पर अंगुश्त

I write, 'Asad', with my heart's fervent heat, my ardent lines I frame,So none can fault my words, nor question my claim.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं 'असद' दिल की जलन से गर्म (तीव्र) शब्द लिखता हूँ, ताकि कोई मेरे शब्दों पर उंगली न रख सके।

विस्तार

लिखता हूँ 'असद' सोज़िश-ए-दिल से सुख़न-ए-गर्म ، ता रख न सके कोई मिरे हर्फ़ पर अंगुश्त । मेरे दोस्त, ग़ालिब कह रहे हैं कि मैं अपने दिल की जलन और तड़प से ऐसे गरम और पुरजोश शब्द लिखता हूँ कि कोई मेरी लिखावट पर उंगली न उठा सके। इस शेर में सोज़िश-ए-दिल का मतलब है दिल की जलन, सुख़न-ए-गर्म का मतलब है तड़पते हुए या पुरजोश शब्द, और अंगुश्त फारसी में उंगली को कहते हैं। देखो मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक बहुत ही दिलचस्प बात कह रहे हैं। आम तौर पर जब कोई किसी चीज़ में कमी निकालता है, तो हम कहते हैं कि उसने उँगली उठाई। लेकिन ग़ालिब कहते हैं कि मेरी शायरी तो मेरे दिल की आग से निकली है, ये इतनी गरम है कि अगर कोई इसमें नुक्स निकालने के लिए इस पर उँगली रखने की कोशिश करेगा, तो उसका हाथ जल जाएगा। वो अपने आलोचकों को समझा रहे हैं कि मेरा कलाम सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि ये मेरी ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों की तपिश है। जब इंसान सच्चाई और तड़प के साथ कुछ कहता है, तो उसकी गहराई इतनी होती है कि आलोचना करने वालों की वहाँ पहुँच ही नहीं होती। ये एक तरह की चुनौती भी है कि मेरा दुख इतना सच्चा है कि इसमें कोई दोष नहीं ढूँढ सकता। ये वैसा ही है जैसे एक दहकता हुआ कोयला, जिसे छूना तो दूर, उसके पास खड़े होना भी मुश्किल होता है, या जैसे सच की आंच हर झूठ को जला देती है। जब बातों में दिल की आग शामिल हो, तो दुनिया केवल सुन सकती है, उंगली नहीं उठा सकती।

कठिन शब्द
सोज़िशBurning, anguish of the heart, internal pain
सुख़नSpeech, word, poetry, verse
हर्फ़Letter, character, word
अंगुश्तFinger (in this context, 'angusht rakhna' implies to find fault, to criticize)

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