कुल्फ़त-ए-अफ़्सुर्दगी को ऐश-ए-बेताबी हराम
वर्ना दंदाँ दर दिल अफ़्शुर्दन बिना-ए-ख़ंदा है
“The anguish of dejection makes the joy of restlessness forbidden;Else, biting lips into the heart would be laughter's true genesis.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
उदासी की पीड़ा बेचैनी के सुख को हराम कर देती है। अन्यथा, दिल में दाँत गड़ाना (अत्यधिक आंतरिक पीड़ा सहना) हँसी का आधार बन जाता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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