नक़्श-ए-इबरत दर नज़र या नक़्द-ए-इशरत दर बिसात
दो-जहाँ वुसअ'त ब-क़द्र-ए-यक-फ़ज़ा-ए-ख़ंदा है
“Is it a warning's trace before the eye, or pleasure's coin on life's wide spread?The two worlds' vastness, reaching high, is but one space a smile has shed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
क्या यह आँखों के सामने एक सबक या चेतावनी का निशान है या जीवन के फैलाव पर आनंद का धन? दोनों जहानों की विशालता एक मुस्कान के स्थान के बराबर है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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