“This magic dust, a world of passion's hidden snare,In death, annihilation's comfort finds a pillow there.”
धूल का जादू, एक पूरे जहाँ के जूनून का छिपा हुआ स्थान। मृत्यु ही फ़ना के आराम का तकिया मालूम होती है।
तिलिस्म-ए-ख़ाक कमीं-गाह-ए-यक-जहाँ सौदा, ब-मर्ग तकिया-ए-आसाइश-ए-फ़ना मा'लूम। Tilisma-e-khaak kamin-gah-e-yak-jahan sauda, ba-marg takiya-e-aasayish-e-fana maloom. यह मिट्टी की दुनिया एक जादुई तिलिस्म है और इंसानी पागलपन के छिपने की जगह है। मौत आने पर ही समझ आता है कि असली आराम का तकिया तो मिट जाने में ही है। तिलिस्म का मतलब जादू होता है, कमीं-गाह उस जगह को कहते हैं जहाँ छिपकर हमला किया जाए, और सौदा का अर्थ जुनून या पागलपन है। आसाइश-ए-फ़ना का मतलब है मिट जाने के बाद मिलने वाला सुख। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ कह रहे हैं कि हम सब एक ऐसे मेले में हैं जो मिट्टी का बना एक जादू है। हमारी सारी इच्छाएँ और चाहतें हमें इस जादू में उलझाए रखती हैं। हम भागते रहते हैं, यह सोचकर कि शायद आगे कहीं सुकून मिलेगा। वह कहते हैं कि यह जो जीवन की बेचैनी है, यह तभी खत्म होती है जब हम खुद को मिटा देते हैं। मौत उनके लिए कोई डरावनी चीज़ नहीं है, बल्कि वह एक मुलायम तकिया है जिस पर सिर रखते ही सारी थकान मिट जाती है। असली शांति तभी आती है जब हम कुछ होने की ज़िद छोड़ देते हैं और इस दुनिया के तिलिस्म से बाहर निकल जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति गहरी नींद में एक बहुत थका देने वाला सपना देख रहा हो और अचानक जागकर महसूस करे कि अब उसे और कहीं नहीं भागना है। असली आराम की शुरुआत वहीं होती है जहाँ दुनिया का शोर थम जाता है।
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