“Asad, he is charmed by cruelty's chosen style,Else, the lure of a faithful promise he knows all the while.”
असद, ज़ुल्म के तरीके के चुनाव पर मोहित है, अन्यथा वफ़ा के वादे का आकर्षण तो मालूम ही है।
'असद' फ़रेफ्ता-ए-इंतिख़ाब-ए-तर्ज़-ए-जफ़ा, वगर्ना दिलबरी-ए-वादा-ए-वफ़ा मा'लूम Asad farefta-e-intekhab-e-tarz-e-jafa, wagarna dilbari-e-waada-e-wafa maloom. असद उस ज़ुल्म के तरीके का दीवाना है जिसे आपने चुना है, वरना वफ़ा के वादों की चमक तो सबको पता ही है। यहाँ शब्द फ़रेफ़्ता का अर्थ है किसी चीज़ पर मोहित होना, और तर्ज़-ए-जफ़ा का अर्थ है दुख पहुँचाने का निराला ढंग। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक बहुत ही गहरी और थोड़ी उदास बात कह रहे हैं। वो कहते हैं कि मैं उन झूठे वादों से थक गया हूँ जो लोग अक्सर प्यार में करते हैं। जब हर कोई कहता है कि वो साथ निभाएगा पर निभाता नहीं, तो वो बातें बेमानी हो जाती हैं। इसीलिए ग़ालिब को अब सामने वाले की बेरुखी में एक ईमानदारी नज़र आती है। वो कहते हैं कि मुझे तुम्हारा ये अंदाज़ पसंद आया कि तुमने मुझे दुख पहुँचाने के लिए एक खास तरीका चुना। इसमें एक सच्चाई है। अक्सर हम मीठे झूठ सुनना चाहते हैं, लेकिन ग़ालिब उस मोड़ पर हैं जहाँ उन्हें कड़वा सच ज़्यादा प्यारा लगता है क्योंकि कम से कम वो सच तो है। यह वैसा ही है जैसे कोई व्यक्ति बनावटी मीठी बातों से इतना ऊब जाए कि उसे किसी का साफ़ और कड़वा सच ज़्यादा सुकून देने लगे। झूठे दिलासों की भीड़ में एक सच्चा ज़ख्म भी कीमती हो जाता है।
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