न पूछ बे-ख़ुदी-ए-ऐश-ए-मक़दम-ए-सैलाब
कि नाचते हैं पड़े सर-ब-सर दर-ओ-दीवार
“Ask not of the wild delight at the flood's advance,For fallen, every door and wall entirely dances.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सैलाब के आने पर खुशी की बेखुदी के बारे में मत पूछो, क्योंकि गिरे हुए दरवाज़े और दीवारें पूरी तरह नाच रहे हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
