इशरत-ए-क़त्ल-गह-ए-अहल-ए-तमन्ना मत पूछ
ईद-ए-नज़्ज़ारा है शमशीर का उर्यां होना
“Do not inquire of the ecstasy of the desirous at their killing ground,For the baring of the sword is a festival for the gaze.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
चाहने वालों की क़त्लगाह की खुशी के बारे में मत पूछो, क्योंकि तलवार का नंगा होना उनके लिए नज़र का त्योहार है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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