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ग़ज़ल

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना

بسکہ دشوار ہے ہر کام کا آساں ہونا
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 9 shers· radif: होना

यह ग़ालिब की ग़ज़ल जीवन की गहन कठिनाइयों को दर्शाती है, यह बताती है कि हर काम का आसान होना कितना दुश्वार है और सच्ची इंसानियत भी मुश्किल से हासिल होती है। यह आंतरिक वीरानगी को चित्रित करती है जो परिवेश में भी फैल जाती है और इच्छा की विरोधाभासी प्रकृति को उजागर करती है, जहाँ स्वयं ही यात्री और आश्चर्य का स्रोत होता है। अंततः, यह ईश्वरीय अभिव्यक्ति की अत्यधिक शक्ति को रेखांकित करती है जो धारणाओं को चुनौती देती है।

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1
बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसाँ होना
हर काम का आसान होना बहुत मुश्किल है। आदमी के लिए भी सच्चा इंसान बनना आसान नहीं है।
2
गिर्या चाहे है ख़राबी मिरे काशाने की दर ओ दीवार से टपके है बयाबाँ होना
मेरा रोना मेरे घर की बर्बादी चाहता है। मेरे घर के दरवाज़ों और दीवारों से वीराना टपक रहा है।
3
वाए-दीवानगी-ए-शौक़ कि हर दम मुझ को आप जाना उधर और आप ही हैराँ होना
ओह, यह कैसी चाहत की दीवानगी है कि हर पल मैं खुद ही उधर जाता हूँ, और फिर खुद ही हैरान हो जाता हूँ।
4
जल्वा अज़-बस-कि तक़ाज़ा-ए-निगह करता है जौहर-ए-आइना भी चाहे है मिज़्गाँ होना
जल्वा इतनी शिद्दत से निगाह का तक़ाज़ा करता है कि आईने का जौहर भी पलकें बनना चाहता है।
5
इशरत-ए-क़त्ल-गह-ए-अहल-ए-तमन्ना मत पूछ ईद-ए-नज़्ज़ारा है शमशीर का उर्यां होना
चाहने वालों की क़त्लगाह की खुशी के बारे में मत पूछो, क्योंकि तलवार का नंगा होना उनके लिए नज़र का त्योहार है।
6
ले गए ख़ाक में हम दाग़-ए-तमन्ना-ए-नशात तू हो और आप ब-सद-रंग-ए-गुलिस्ताँ होना
हम खुशी की तमन्ना का दाग़ मिट्टी में ले गए। तुम खुद सौ रंगों वाले गुलिस्ताँ की तरह बने रहो।
7
इशरत-ए-पारा-ए-दिल ज़ख़्म-ए-तमन्ना खाना लज़्ज़त-ए-रीश-ए-जिगर ग़र्क़-ए-नमक-दाँ होना
दिल के टुकड़े की खुशी तमन्ना (इच्छा) के घाव को सहना है। घायल जिगर का आनंद नमक-दान में डूब जाना है।
8
की मिरे क़त्ल के बा'द उस ने जफ़ा से तौबा हाए उस ज़ूद-पशेमाँ का पशेमाँ होना
मेरे क़त्ल के बाद उसने अपनी क्रूरता से तौबा की। अफ़सोस, उस जल्द पश्चाताप करने वाले का पश्चाताप करना।
9
हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत 'ग़ालिब' जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गरेबाँ होना
हे ग़ालिब, उस छोटे से कपड़े के टुकड़े की क़िस्मत पर अफ़सोस है, जिसकी नियति किसी प्रेमी का गरेबाँ बनना है।
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