गो न समझूँ उस की बातें गो न पाऊँ उस का भेद
पर ये क्या कम है कि मुझ से वो परी-पैकर खुला
“Though I may not grasp her words, nor her secrets unravel,Is it then a small thing, that to me, that fairy-form did reveal?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
भले ही मैं उसकी बातें न समझूँ और उसके रहस्य न जान पाऊँ, पर क्या यह कम है कि वह परी-जैसी सुंदर आकृति वाली मुझ पर प्रकट हुई?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
