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नाला-ए-दिल नग़्मा-रेज़ाँ है ब-मिज़राब-ए-ख़याल
रिश्ता-ए-पा याँ नवा-सामान-ए-बंद-ए-साज़ है

My heart's lament pours forth in tuneful stream,Struck by the plectrum of my waking dream.Here, even the foot's chain, a novel way,Becomes the means for strings to softly play.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

दिल का नाला ख़याल के मिज़राब से नग़्मे बिखेर रहा है। यहाँ पैर का बंधन साज़ के तार के लिए संगीत का साधन है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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