किस तरह काटे कोई शब-हा-ए-तार-ए-बर्शिगाल
है नज़र ख़ू-कर्दा-ए-अख़्तर-शुमारी हाए हाए
“How can one endure the dark nights of winter's gloom?My gaze, alas, is accustomed to counting stars!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
कोई व्यक्ति सर्दी की अंधेरी रातें कैसे बिता सकता है? मेरी आँखें तो तारे गिनने की आदी हैं, हाय!
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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