हाथ ही तेग़-आज़मा का काम से जाता रहा
दिल पे इक लगने न पाया ज़ख़्म-ए-कारी हाए हाए
“The hand of the sword-wielder itself grew weak and failed,Alas, not a single mortal wound on my heart prevailed!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तलवार चलाने वाले का हाथ ही काम करने से चला गया। दिल पर एक भी जानलेवा घाव लग न पाया, हाए हाए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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