अल्लाह-रे ज़ौक़-ए-दश्त-नवर्दी कि बा'द-ए-मर्ग
हिलते हैं ख़ुद-ब-ख़ुद मिरे अन्दर कफ़न के पाँव
“Oh, such is my desert-roaming passion, that even after death, Within my shroud, my feet still stir and move themselves.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ओह, मेरी रेगिस्तान में घूमने की ऐसी दीवानगी है कि मौत के बाद भी, मेरे कफ़न के अंदर मेरे पैर अपने आप हिलते रहते हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
