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दिल में ज़ौक़-ए-वस्ल ओ याद-ए-यार तक बाक़ी नहीं
आग इस घर में लगी ऐसी कि जो था जल गया

In the heart, no zest for union, no beloved's memory lingers, Such a fire consumed this house, that all that was, now only cinders.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

दिल में मिलन की चाह और यार की याद तक बाकी नहीं रही। इस घर में ऐसी आग लगी कि जो कुछ भी था, सब जल गया।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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