अर्ज़ कीजे जौहर-ए-अंदेशा की गर्मी कहाँ
कुछ ख़याल आया था वहशत का कि सहरा जल गया
“Where is the ardent essence of thought's deep fire?A mere thought of madness arose, and the desert burned entire.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
बताइए, सोच के जौहर की गर्मी कहाँ है? वहशत का बस एक ख़याल आया था कि सहरा जल गया।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
