था मुझ को ख़ार-ख़ार-ए-जुनून-ए-वफ़ा 'असद'
सोज़न में था नहुफ़्ता गुल-ए-पैरहन हनूज़
“Asad, the thorny madness of fidelity was mine,When still the garment's flower in the needle did recline.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
असद, मुझे वफ़ा का काँटेदार जुनून था, जबकि उस वक़्त भी लिबास का फूल अभी तक सुई में ही छिपा हुआ था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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