बेगाना-ए-वफ़ा है हवा-ए-चमन हुनूज़
'वो' सब्ज़ा सँग पर न उगा कोहकन हुनूज़
“The garden's breeze is still a stranger to loyalty,That verdure on the stone for Kohkan bloomed not yet.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
चमन की हवा अभी भी वफ़ा से बेगानी है। वह सब्ज़ा अभी तक कोहकन के लिए पत्थर पर नहीं उगा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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