आता है दाग़-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद
मुझ से मिरे गुनह का हिसाब ऐ ख़ुदा न माँग
“I recall the count of my heart's longing's scars,O God, do not demand from me the reckoning of my sins.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे अपने दिल की हसरतों के दाग़ों की गिनती याद आती है। ऐ ख़ुदा, मुझसे मेरे गुनाहों का हिसाब न माँग।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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