आता है एक पारा-ए-दिल हर फ़ुग़ाँ के साथ
तार-ए-नफ़स कमंद-ए-शिकार-ए-असर है आज
“A fragment of heart emerges with every lament;Today, the thread of breath is a lasso to hunt for its effect.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हर आह के साथ दिल का एक टुकड़ा निकलता है। आज साँस का धागा असर का शिकार करने वाली कमंद बना हुआ है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
