ऐ आफ़ियत किनारा कर ऐ इंतिज़ाम चल
सैलाब-ए-गिर्या दरपय-ए-दीवार-ओ-दर है आज
“O comfort, step aside! O order, be gone! A flood of tears today pursues every wall and door.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हे आराम, किनारे हो जा और हे व्यवस्था, दूर हट जा। आज आँसुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि वह हर दीवार और दरवाज़े को अपनी चपेट में ले रहा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
