ता-सुब्ह है ब-मंज़िल-ए-मक़्सद रसीदनी
दूद-ए-चराग़-ए-ख़ाना ग़ुबार-ए-सफ़र है आज
“Till morning is the destined arrival; The house-lamp's smoke today is travel's dust.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सुबह तक मंज़िल पर पहुँचना है। आज घर के चिराग़ का धुआँ सफ़र की धूल है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
