जो ये कहे कि रेख़्ता क्यूँके हो रश्क-ए-फ़ारसी
गुफ़्ता-ए-'ग़ालिब' एक बार पढ़ के उसे सुना कि यूँ
“Should one inquire, 'How can Rekhta make Persian envious?' Read Ghalib's words to him once, and show him thus.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि कोई पूछे कि रेख़्ता (उर्दू/हिंदी शायरी) फ़ारसी शायरी से बेहतर कैसे हो सकती है, तो उसे एक बार 'ग़ालिब' का कलाम पढ़कर सुनाओ, और इस तरह उसे दिखाओ।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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