अज़-खुद-गुज़श्तगी में ख़मोशी पे हर्फ़ है
मौज-ए-ग़ुबार-ए-सुर्मा हुई है सदा मुझे
“In self-oblivion, even silence earns reproach,My voice has become a wave of kohl's fine dust.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आत्म-विस्मृति की अवस्था में, खामोशी पर भी दोष है। मेरी आवाज़ सुरमे की महीन धूल की लहर बन गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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