जाना पड़ा रक़ीब के दर पर हज़ार बार
ऐ काश जानता न तिरे रह-गुज़र को मैं
“I had to visit the rival's door a thousand times.Oh, I wish I had never known your path!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे अपने प्रतिद्वंद्वी के दरवाज़े पर हज़ारों बार जाना पड़ा। काश मैं तुम्हारे रास्ते से कभी वाकिफ़ ही न होता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
