छोड़ा न रश्क ने कि तिरे घर का नाम लूँ
हर इक से पूछता हूँ कि जाऊँ किधर को मैं
“Envy did not allow me to utter your house's name,From each person I ask, 'Where should I go now?'”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ईर्ष्या ने मुझे तुम्हारे घर का नाम लेने नहीं दिया, इसलिए मैं हर किसी से पूछता हूँ कि मुझे किधर जाना चाहिए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
