Sukhan AI
किस जुर्म से है चश्म तुझे हसरत क़ुबूल
बर्ग-ए-हिना मगर मिज़ा-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ नहीं

For what crime, O eye, do you embrace this longing's pain?Are not your blood-shedding lashes like henna's crimson stain?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे आँख, किस अपराध के कारण तू इस हसरत को स्वीकार करती है? क्या तेरी खून बहाने वाली पलकें मेहंदी के पत्ते जैसी नहीं हैं?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.