अगर वो सर्व-क़द गर्म-ए-ख़िराम-ए-नाज़ आ जावे
कफ़-ए-हर-ख़ाक-ए-गुलशन शक्ल-ए-क़ुमरी नाला-फ़र्सा हो
“If that cypress-statured one, with a proud and graceful walk, arrives,The palm of every garden's dust will become a dove, lamenting.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर वह लंबे क़द वाला महबूब अपनी नाज़ुक और इतराती चाल के साथ आ जाए, तो हर बाग़ की धूल भी कबूतर की शक्ल अख़्तियार कर के विलाप करने लगेगी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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