यूसुफ़ उस को कहूँ और कुछ न कहे ख़ैर हुई
गर बिगड़ बैठे तो मैं लाइक़-ए-ताज़ीर भी था
“I called him Yusuf, and he said nothing; it was fortunate.Had he taken offense, I too deserved punishment.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैंने उसे यूसुफ़ कहा और वह कुछ न बोला, यह अच्छा हुआ। अगर वह नाराज़ हो जाता, तो मैं सज़ा का हक़दार भी था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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