हुई ये कसरत-ए-ग़म से तलफ़ कैफ़ियत-ए-शादी
कि सुब्ह-ए-ईद मुझ को बद-तर अज़-चाक-ए-गरेबाँ है
“My state of joy is ruined by this excess of grief,so that Eid's morning for me is worse than a torn collar.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अत्यधिक दुख के कारण मेरी खुशी की हालत बर्बाद हो गई है, इसलिए ईद की सुबह भी मुझे फटे हुए गिरेबान से भी बदतर लगती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
