Sukhan AI
दर-ख़ुर-ए-अर्ज़ नहीं जौहर-ए-बेदाद को जा
निगह-ए-नाज़ है सुरमे से ख़फ़ा मेरे बा'द

The essence of injustice finds no room for its display,The coy glance will be displeased with kohl after my day.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अन्याय के सार को प्रकट होने का स्थान नहीं मिलता। मेरे बाद तो नाज़ भरी निगाह सुरमे से भी ख़फ़ा रहेगी।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.